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एक दूसरा भारत

सारे जहां से अच्छा हिन्दुस्तान हमारा, ये पंक्तियां इस धरा की व्याख्या करने में सक्षम हैं, जल , जंगल, पहाड़ समुद्र, क्या नहीं है हमारे पास ? समस्त सुविधाओं के होते हुए आम जन तक उनकी पहुंच न हो पाना कहीं न कहीं हमारे एकतरफा विकास को दर्शाता है. एक तरफ हमारा राष्ट्र सफलता की नित ऊंचाईया छू रहा है वहीं दूसरी और इसी देश के कई हिस्से मूलभूत सुविधाओं से भी वंचित हैं, पूर्वोत्तर भारत हो या उतराखंड हिमाचल जैसे राज्य भी इस वंचना से पीड़ित हैं, एक तरफ हम बुलेट ट्रेन चलाने का विचार रखते हैं वहीं हमारे कई गांव अभी तक सड़क से नहीं जुड़ पाये। ऐसे में इन क्षेत्रों से पलायन होना स्वाभाविक ही है, झकझोर देने वाला यह पलायन शहरों में दबाव बडा़ रहा है तो वहीं गांवों की हालत घोष्ट विलेज के रूप में सामने आ रही है. "गांवों में हैं तो केवल बुजुर्ग" जो अपनी मिट्टी अपनी भूमि को छोडकर नहीं जाना चाहते. लेकिन आमूल परिस्थितियों में उन्हें भी बोझिल मन से अपने पितरों की भूमि से दूर होना पडता है जिसमें स्वास्थ्य एक बडा़ कारण होता है. नीति निर्माण करने वाले एसी कमरों से निकलना ही नहीं चाहते कैसे उन्हें दूसरा भारत द...